ISRO का Anvesha Satellite क्या है? जानिए भारत की ‘सब कुछ देखने वाली’ ताकत
12 जनवरी 2026 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO ने भारत के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण लॉन्च कार्य किया — जिसमें उसने DRDO (Defence Research and Development Organisation) के अत्याधुनिक उपग्रह “Anvesha” को अंतरिक्ष में भेजने का प्रयास किया। यह मिशन PSLV-C62 / EOS-N1 के नाम से जाना जाता है, जिसमें कुल 16 उपग्रह लॉन्च किए गए हैं, जिनमें Anvesha प्रमुख पेलोड था। इस लॉन्च के कारण वैज्ञानिक जगत और रक्षा क्षेत्र में भारत की क्षमता पर बहुत ध्यान गया।
1. PSLV-C62 मिशन का प्रमुख लक्ष्य
PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) भारत का सबसे भरोसेमंद और कार्यक्षम लॉन्च वाहन है, जिसे पृथ्वी की सौर-सिंक (Sun-synchronous) कक्षा में उपग्रह भेजने के लिए प्रयोग किया जाता है। PSLV-C62 मिशन का मुख्य उद्देश्य DRDO के EOS-N1 (Anvesha) उपग्रह को तकरीबन 505 किलोमीटर की ऊंचाई वाली कक्षा में स्थापित करना था। इस मिशन में साथ में कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय को-पैसेंजर उपग्रह भी थे, जो अलग-अलग उद्देश्यों जैसे वैज्ञानिक अनुसंधान, रिमोट सेंसिंग और टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन के लिए भेजे गए थे।
लेकिन इस मिशन के दौरान रॉकेट के तीसरे चरण (PS3) में उड़ान पथ में एक विचलन देखा गया, जिसके कारण यह तय कक्षा में पहुँचने में असफल रहा। रिपोर्टों के अनुसार ना केवल Anvesha बल्कि सभी 16 उपग्रहों का लक्ष्य कक्षा हासिल होना संदिग्ध हो गया है और वे लापता या नष्ट हो सकते हैं। यह PSLV के इतिहास में एक दुर्लभ अपूर्णता है और इसके कारण बहुत सारे तकनीकी और आर्थिक प्रश्न उठ रहे हैं।
2. “Anvesha” उपग्रह क्या है?
Anvesha एक अत्याधुनिक हाइपरस्पेक्ट्रल पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (Hyperspectral Earth Observation Satellite) है, जिसे DRDO द्वारा विकसित किया गया है। इसका तकनीकी नाम EOS-N1 है। इस उपग्रह का मुख्य कार्य उन तस्वीरों को लेना है, जो केवल सामान्य कैमरों से सम्भव नहीं है — यानी यह मूल रूप से एक बेहद शक्तिशाली और संवेदनशील “अमुक-दृष्टि” कैमरा है जो सामग्री की अंतरतम जानकारी को संकलित कर सकता है।
हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग (Hyperspectral Imaging) क्या है?
साधारण कैमरे केवल लाल, हरा और नीला (RGB) रंगों में तस्वीरें लेते हैं। वहीं हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सेंसर सैकड़ों संकीर्ण प्रकाश तरंगदैर्घ्यों को रिकॉर्ड करते हैं, जिससे तस्वीर में दिखने वाली सामग्री के बारे में अति-विशेष जानकारी मिलती है — जैसे कि रंग, बनावट, रसायनिक संरचना और पर्यावरण-आधारित संकेत। Anvesha इसी क्षमता के साथ विकसित किया गया था, जिससे यह निगरानी, पहचान और विश्लेषण में बेहद उन्नत परिणाम देता।
3. Anvesha के प्रमुख उपयोग / Applications
🛰️ रक्षा और सुरक्षा (Strategic Surveillance)
Anvesha की सबसे बड़ी भूमिका रक्षा क्षेत्र में है। इसकी हाइपरस्पेक्ट्रल क्षमता की वजह से यह सीमा पर गतिविधियों, छिपे हुए ठिकानों, बंकरों, वाहनों, हथियारों और वस्तुओं की विशेष पहचान कर सकता है जो सामान्य कैमरों से छिपे रहते हैं। ऐसे लक्ष्यों के नीचे क्या है – चाहे वह जंगलों में छिपे वाहन हों या नकाबपोश दुश्मन गतिविधियाँ – यह उपग्रह इन्हें अलग-अलग तरंगदैर्घ्यों के संकेतनुसार पहचान सकता है।
🌾 कृषि और पर्यावरण निगरानी (Agriculture & Environment Monitoring)
हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा से फसलों के रोग, पोषण की स्थिति, मिट्टी का स्वास्थ्य, जल स्रोतों की गुणवत्ता और वन क्षेत्र की स्थिति की जानकारी उच्च श्रेणी में प्राप्त की जा सकती है। इससे नीति-निर्माता और किसान बेहतर कृषि योजना और जोखिम प्रबंधन कर सकते हैं।
🛰️ प्राकृतिक आपदा प्रबंधन (Disaster Management)
भूकंप, बाढ़, सूखे या जंगल की आग जैसी आपदाओं की निगरानी के लिए भी हाइपरस्पेक्ट्रल छवियाँ बेहद उपयोगी होती हैं। Anvesha जैसे उपग्रह इन क्षेत्रों में होने वाले परिवर्तनों की तुरंत पहचान कर सकते हैं, जिससे तात्कालिक राहत-कार्य में सहायता मिल सकती है।
4. तकनीकी विशेषताएँ
• वजन : लगभग 400 किलो (कुछ स्रोतों के अनुसार 100-150 किलो) – यह मिशन के लक्ष्य और डिजाइन के हिसाब से अलग हो सकता है।
• कक्षा : सन-सिंक कक्षा (लगभग 505 किमी) जो पृथ्वी का विस्तृत सतह अवलोकन संभव करता है।
• इमेजिंग क्षमता: सैकड़ों संकीर्ण स्पेक्ट्रल बैंड में डेटा कैप्चर करने की क्षमता – पारंपरिक RGB से बहुत आगे।
• उद्देश्य : सामरिक निगरानी, सामग्री पहचान, पर्यावरण-निगरानी, कृषि विश्लेषण और आपदा प्रतिक्रिया।
5. मिशन के परिणाम और भविष्य
हालांकि ISRO ने PSLV-C62 मिशन लॉन्च कर दिया और प्रारंभिक चरण का प्रक्षेपण भी किया, तीसरे चरण के बाद रॉकेट के लक्ष्य कक्षा में प्रवेश न कर पाने की समस्या सामने आई। इससे न केवल Anvesha बल्कि सह-यात्री उपग्रहों का खो जाना संभव है और यह तकनीकी एवं आर्थिक दृष्टि से बड़ी चुनौती बन सकती है।
ISRO इस घटना की डीटा का विश्लेषण कर रहा है और भविष्य के मिशनों को सुरक्षित और सफल बनाने के लिए तकनीकी सुधार करेगा। यह घटना भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए सीख का अवसर है, ताकि भविष्य में इसी तरह की तकनीकी कठिनाइयों से निपटा जा सके।
Anvesha उपग्रह अपने हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग क्षमता की वजह से भारत के लिए वैज्ञानिक, सामरिक और नागरिक क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण उपकरण बनने वाला था। यह तकनीक जहाँ सीमा-निगरानी और सुरक्षा को नई ऊँचाइयों पर ले जा सकती थी, वहीं कृषि, पर्यावरण एवं प्राकृतिक आपदा प्रबंधन में भी भारत को अत्याधुनिक डेटा प्रदान कर सकती थी। हालांकि PSLV-C62 मिशन की अप्रत्याशित समस्या ने इस उपग्रह को कक्षा में स्थापित होने से रोक दिया, फिर भी इस अभियान का महत्व, तैयारी और तकनीकी उपलब्धियाँ भारतीय अंतरिक्ष और रक्षा कार्यक्रम की मजबूती को दर्शाती हैं।
भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी समुदाय के प्रयासों से भविष्य में इस तरह की अत्याधुनिक तकनीकों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित और उपयोग में लाया जाएगा। Anvesha के विकास, लॉन्च प्रयास और उसकी तकनीकी क्षमता ने यह प्रमाणित कर दिया है कि भारत अब उन्नत स्पेस-आधारित इमेजिंग और निगरानी तकनीकों के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहा है।
