IIT-D की इंजीनियरिंग क्रांति, इलेक्ट्रिक साइकिल से स्मार्ट डस्टबिन तक, रोज़मर्रा की जिंदगी को आसान बनाने वाले इनोवेशन

IIT-D की इंजीनियरिंग क्रांति, इलेक्ट्रिक साइकिल से स्मार्ट डस्टबिन तक, रोज़मर्रा की जिंदगी को आसान बनाने वाले इनोवेशन

                      भविष्य के इंजीनियर्स का प्रदर्शन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IIT-D), इंजीनियरिंग शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में हमेशा अग्रणी रहा है। हाल ही में संस्थान के पहले वर्ष के B.Tech छात्रों द्वारा आयोजित ‘मैन्युफैक्चरिंग इनोवेशन शो 2025’ ने यह साबित कर दिया कि भारतीय इंजीनियरिंग का भविष्य अत्यंत उज्जवल है। इस शो में लगभग 700 छात्रों ने मिलकर 140 से अधिक रिसर्च-आधारित प्रोटोटाइप और अभिनव मॉडल प्रदर्शित किए। इन युवा दिमागों का मुख्य उद्देश्य सिद्धांत को व्यावहारिक रूप में बदलना और रोज़मर्रा की जीवन की जटिलताओं को सरल तथा किफायती तकनीकी समाधानों से हल करना था। सबसे अधिक ध्यान खींचने वाले नवाचारों में स्मार्ट डस्टबिन ( जो स्वच्छता प्रबंधन में क्रांति ला सकता है ) और किफायती इलेक्ट्रिक साइकिल ( जो टिकाऊ आवागमन का वादा करती है ) शामिल थे। ये प्रोजेक्ट्स न केवल छात्रों के इंजीनियरिंग कौशल को दर्शाते हैं, बल्कि देश में ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की भावना को भी आगे बढ़ाते हैं।

1. अभिनवता का केंद्र :
MEP1001 कोर्स की भूमिका IIT-D के इन सफल नवाचारों की नींव उनके विशिष्ट पाठ्यक्रम में निहित है। ‘मैन्युफैक्चरिंग इनोवेशन शो’ वास्तव में पहले वर्ष के B.Tech छात्रों द्वारा सफलतापूर्वक पूरे किए गए कोर्स ‘MEP1001 : Manufacturing for Product Innovation’ का अंतिम परिणाम होता है। इस कोर्स का उद्देश्य छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें डिजाइन, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), और प्रोटोटाइप बनाने के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराना है। छात्रों को एक समस्या की पहचान करने, उसके लिए एक इंजीनियरिंग समाधान डिजाइन करने, उसे वास्तविक रूप में बनाने ( मैन्युफैक्चर ) करने और फिर उसे प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। यह हैंड्स-ऑन दृष्टिकोण छात्रों को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का सामना करने और उनका समाधान खोजने के लिए तैयार करता है।

2. पहला मुख्य इनोवेशन :
स्मार्ट डस्टबिन और स्वच्छता क्रांति मेक्ट्रॉनिक्स (Mechatronics) श्रेणी में छात्रों द्वारा प्रस्तुत ‘स्मार्ट डस्टबिन’ कचरा प्रबंधन के पारंपरिक तरीकों को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखता है। यह नवाचार एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय समस्या – स्वच्छता और अपशिष्ट पृथक्करण (Waste Segregation) – को संबोधित करता है।

स्मार्ट डस्टबिन की कार्यप्रणाली और विशेषताएँ :
स्वचालित उद्घाटन (Auto-Opening System): यह डस्टबिन सेंसर-आधारित तकनीक का उपयोग करता है। जब कोई उपयोगकर्ता इसके पास आता है, तो इन्फ्रारेड सेंसर या अल्ट्रासोनिक सेंसर हाथों की उपस्थिति को पहचानता है और ढक्कन अपने आप खुल जाता है। यह सुविधा सार्वजनिक और निजी स्थानों पर हाथ से छूने की आवश्यकता को समाप्त करती है, जिससे स्वच्छता और हाइजीन सुनिश्चित होती है।

कचरा पृथक्करण (Waste Segregation): यह इस नवाचार का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। इसमें अक्सर तीन डिब्बे शामिल होते हैं, जो कचरे को गीला (Wet), सूखा (Dry) और पुनर्चक्रण योग्य (Recyclable) श्रेणियों में अलग करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। सेंसर या इमेज प्रोसेसिंग तकनीक का उपयोग करके यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है कि कचरा सही डिब्बे में जाए, जिससे पुनर्चक्रण प्रक्रिया बहुत कुशल हो जाती है।

भरने की निगरानी और अलर्ट (Fill-Level Monitoring): डस्टबिन के भीतर लगे सेंसर कचरे के स्तर की लगातार निगरानी करते हैं। जब डस्टबिन लगभग भर जाता है, तो यह Wi-Fi या GSM मॉड्यूल के माध्यम से सफाई प्रबंधन विभाग या संबंधित प्राधिकरण को स्वचालित अलर्ट भेजता है।

सामाजिक और राष्ट्रीय प्रभाव :
यह स्मार्ट डस्टबिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। नगरपालिकाएँ (Municipalities) कचरा संग्रहण के लिए कम संसाधनों का उपयोग करके अधिक कुशल रूट योजना बना सकती हैं, जिससे परिचालन लागत कम होती है और शहरों में स्वच्छता का स्तर बेहतर होता है।

3. दूसरा मुख्य इनोवेशन :
इलेक्ट्रिक साइकिल और टिकाऊ गतिशीलता मैकेनिकल इंजीनियरिंग सेक्शन में छात्रों ने इलेक्ट्रिक साइकिल (E-Bicycle) का एक ऐसा प्रोटोटाइप प्रस्तुत किया जो टिकाऊ आवागमन (Sustainable Mobility) के क्षेत्र में गेमचेंजर साबित हो सकता है। यह शहरी यातायात में भीड़भाड़ और बढ़ते प्रदूषण की दोहरी समस्या का समाधान करता है।

किफायती आवागमन : इलेक्ट्रिक साइकिलें, पेट्रोल या डीजल से चलने वाले वाहनों की तुलना में कहीं अधिक किफायती होती हैं। यह छात्रों, दैनिक यात्रियों और कम दूरी की यात्रा करने वाले लोगों के लिए परिवहन का एक सस्ता साधन प्रदान करती है।

पर्यावरण – अनुकूल : शून्य उत्सर्जन (Zero Emission) के कारण यह वायु प्रदूषण को कम करने में सहायक है। यह इनोवेशन भारत जैसे घनी आबादी वाले देशों के लिए एक टिकाऊ और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है।

ऊर्जा दक्षता और प्रदर्शन : छात्रों ने साइकिल को इस तरह से डिज़ाइन किया है कि यह बैटरी की कम ऊर्जा का उपयोग करके भी प्रभावशाली माइलेज और प्रदर्शन दे सके। इसका मतलब है कि उपयोगकर्ता को लंबी दूरी के लिए भी बिजली पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। यह प्रोजेक्ट भारतीय बाजार में मौजूद महंगे ई-स्कूटरों का एक सस्ता और शारीरिक रूप से सक्रिय विकल्प प्रदान करता है, जो फिटनेस और पर्यावरण चेतना दोनों को बढ़ावा देता है।

4. अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स : जीवन को आसान बनाने के समाधान 140 से अधिक नवाचारों के साथ, यह शो केवल डस्टबिन या साइकिल तक सीमित नहीं था। विभिन्न श्रेणियों में छात्रों ने रोजमर्रा के जीवन के लिए व्यावहारिक समाधान पेश किए

1. IoT और ऑटोमेशन में दक्षता : ऑटोमैटिक वॉटर टाइमर विद रेन सेंसर, यह कृषि और जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट नवाचार है। यह ड्रिप सिंचाई के लिए एक स्वचालित प्रणाली है जो बारिश होने पर सेंसर के माध्यम से सिंचाई को तुरंत रोक देती है। यह जल-कुशल प्रबंधन (Water Management) को सुनिश्चित करता है और किसान के समय तथा संसाधनों की बचत करता है।

IoT डोर लॉक और होम ऑटोमेशन : घर की सुरक्षा और सुविधा को बढ़ाने के लिए स्मार्ट डोर लॉक सिस्टम्स और सामान्य घरेलू उपकरणों को नियंत्रित करने वाले IoT सॉल्यूशंस का प्रदर्शन किया गया।

2. हेल्थकेयर और जीवन की गुणवत्ता : छात्रों ने सस्ते और पोर्टेबल हेल्थकेयर उपकरण बनाए, जैसे कि डिजिटल ब्लड प्रेशर मॉनिटर और IoT पल्स ऑक्सीमीटर। ये उपकरण ग्रामीण या दूरस्थ क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य की निगरानी को आसान और सुलभ बनाने में मदद कर सकते हैं।

3. पर्यावरण और रीसाइक्लिंग : रिवर सरफेस वेस्ट क्लीनिंग मशीन : यह मशीन भारत की प्रदूषित नदियों की सतह से कचरा और प्लास्टिक हटाने के लिए डिज़ाइन की गई है।

हैंड-पावर्ड पोर्टेबल वॉशिंग मशीन : उन क्षेत्रों के लिए एक सरल लेकिन प्रभावी समाधान जहाँ बिजली की आपूर्ति अनियमित है।

3D प्रिंटर फिलामेंट मेकर : यह नवाचार प्लास्टिक कचरे (जैसे PET बोतलों) को रीसाइकल करके 3D प्रिंटिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले फिलामेंट में बदल देता है। यह चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के सिद्धांत को मजबूत करता है।

‘मेक इन इंडिया’ की भावना IIT-D के पहले साल के B.Tech छात्रों द्वारा किया गया यह ‘मैन्युफैक्चरिंग इनोवेशन शो’ सिर्फ एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के तकनीकी भविष्य की झाँकी है। ये इनोवेशन दर्शाते हैं कि भारतीय युवा इंजीनियरिंग के सिद्धांतों को न केवल समझते हैं, बल्कि उन्हें सामाजिक और पर्यावरणीय समस्याओं को हल करने के लिए व्यावहारिक, किफायती और टिकाऊ समाधानों में परिवर्तित करने की क्षमता भी रखते हैं। इलेक्ट्रिक साइकिल, स्मार्ट डस्टबिन और अन्य ऑटोमेशन प्रोजेक्ट्स बताते हैं कि भारतीय इंजीनियरिंग अब केवल बाहरी तकनीक पर निर्भर नहीं है, बल्कि वह अपनी विशिष्ट चुनौतियों के लिए अपने खुद के समाधान विकसित कर रही है। यह नवाचार की यही भावना है जो ‘मेक इन इंडिया’ के सपने को साकार करेगी और रोज़मर्रा की जिंदगी को आसान, स्वच्छ और स्मार्ट बनाएगी।

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