चीन-जापान युद्ध के मुहाने पर, शक्ति संतुलन, वैश्विक गठजोड़ और महाविनाश का खतरा

चीन-जापान युद्ध के मुहाने पर, शक्ति संतुलन, वैश्विक गठजोड़ और महाविनाश का खतरा

                    तनाव का बढ़ता पारा पूर्वी एशिया में चीन और जापान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसने पूरे क्षेत्र को युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। ताइवान जलडमरूमध्य से लेकर सेनकाकू / दियाओयू द्वीप समूह तक, दोनों देशों के बीच जारी भू-राजनीतिक खींचतान अब सैन्य तैयारी में बदलती दिख रही है। जापान की नई रक्षा नीति, जिसमें चीन की आक्रामकता का जवाब देने के लिए सेना को मजबूती देने की बात कही गई है, ने बीजिंग को और भी अधिक उत्तेजित कर दिया है। यह टकराव केवल दो एशियाई शक्तियों तक सीमित नहीं रहेगा, यह एक ऐसा वैश्विक संकट पैदा कर सकता है जिसमें दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ और सैन्य ताकतें – अमेरिका और रूस – सीधे या परोक्ष रूप से शामिल हो सकती हैं। यह Article चीन और जापान की वर्तमान सैन्य शक्तियों का विस्तृत तुलनात्मक विश्लेषण करता है और यह जानने का प्रयास करता है कि इस संभावित संघर्ष में अमेरिका और रूस जैसे प्रमुख खिलाड़ी किसकी तरफ होंगे।

1. ऐतिहासिक और भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि :
चीन और जापान के संबंध सदियों पुरानी प्रतिस्पर्धा और द्वितीय विश्व युद्ध की कड़वी स्मृतियों से भरे हुए हैं। जापान के युद्ध अपराधों को लेकर चीन में आज भी गहरा गुस्सा है, जबकि जापान चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति को अपने लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है।

वर्तमान फ्लैशपॉइंट्स :
सेनकाकू / दियाओयू द्वीप समूह, पूर्वी चीन सागर में स्थित इन निर्जन द्वीपों पर दोनों देश दावा करते हैं। यह क्षेत्र न केवल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहाँ तेल और गैस के बड़े भंडार होने की संभावना है। दोनों देशों के तटरक्षक बल नियमित रूप से इस क्षेत्र में एक-दूसरे के आमने-सामने आते हैं, जिससे गलती से टकराव की आशंका बनी रहती है।

ताइवान :
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि जापान और अमेरिका ताइवान की लोकतांत्रिक व्यवस्था को समर्थन देते हैं। यदि चीन ताइवान पर हमला करता है, तो जापान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है, जो सीधे बीजिंग के लिए युद्ध की चेतावनी है। ये तनावपूर्ण बिंदु किसी भी समय एक बड़ी सैन्य कार्रवाई को जन्म दे सकते हैं, और यही कारण है कि दुनिया इस क्षेत्र पर इतनी बारीकी से नज़र रख रही है।


2. सैन्य शक्ति का तुलनात्मक विश्लेषण (2025 के आंकड़े)
एक संभावित युद्ध में कौन विजयी होगा, यह समझने के लिए दोनों देशों की सैन्य क्षमताओं की तुलना आवश्यक है। ग्लोबल फायरपावर जैसे संगठनों द्वारा संकलित आंकड़ों के आधार पर, चीन संख्या और क्षमता में जापान से कहीं आगे है, लेकिन जापान की सेना अपनी तकनीकी श्रेष्ठता और प्रशिक्षण के कारण एक दुर्जेय प्रतिद्वंद्वी बनी हुई है।

चीन की सैन्य शक्ति :
संख्या और मिसाइलों का प्रभुत्व पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) दुनिया की सबसे बड़ी और तेजी से आधुनिक हो रही सेना है।

सक्रिय सैनिक :
चीन के पास लगभग 20 लाख सक्रिय सैनिक हैं, जो जापान की सेना के आकार से आठ गुना अधिक हैं। यह संख्या किसी भी लंबी लड़ाई में निर्णायक साबित हो सकती है।

नौसेना (PLAN):
चीन की नौसेना दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है, जिसके पास 700 से अधिक जहाज हैं, जिनमें तीन परिचालन एयरक्राफ्ट कैरियर भी शामिल हैं। यह शक्ति चीन को प्रशांत महासागर में अपनी शक्ति को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित करने की क्षमता देती है।

वायुसेना :
PLA के पास 3,000 से अधिक लड़ाकू विमानों का बेड़ा है। इसमें उन्नत स्टील्थ फाइटर्स (जैसे J-20) भी शामिल हैं, जो क्षेत्रीय हवाई श्रेष्ठता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

मिसाइलें :
चीन की सबसे बड़ी ताकत उसकी बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलों का विशाल भंडार है। चीन के पास ऐसी ‘कैरियर-किलर’ मिसाइलें हैं जो दूर से ही अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर्स को निशाना बना सकती हैं, जिससे जापान पर हमला करने की उसकी क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।

जापान की सैन्य शक्ति :
तकनीक और प्रशिक्षण की धार जापान सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज (JSDF) अपनी संवैधानिक सीमाओं के कारण आकार में छोटी है, लेकिन अत्यधिक उन्नत और पेशेवर है।

सक्रिय सैनिक :
जापान के पास लगभग 2.5 लाख सक्रिय सैनिक हैं।

नौसेना :
जापान की नौसेना (JMSDF) दुनिया की सबसे बेहतरीन और आधुनिक नौसेनाओं में से एक है। इसके पास 150 से अधिक जहाज हैं, जिनमें कई हेलीकॉप्टर कैरियर्स शामिल हैं, जिन्हें भविष्य में F-35B जैसे लड़ाकू विमानों के लिए हल्के एयरक्राफ्ट कैरियर्स में बदला जा सकता है।

वायुसेना :
जापान की वायुसेना (JASDF) के पास लगभग 1,500 विमान हैं। इनमें अमेरिका द्वारा निर्मित अत्याधुनिक F-35 और F-15 फाइटर जेट्स शामिल हैं। इनकी तकनीकी श्रेष्ठता उन्हें संख्यात्मक रूप से बड़े चीनी बेड़े के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाती है।

तकनीकी श्रेष्ठता :
जापान की सेना उच्च तकनीक वाले सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रशिक्षण पर निर्भर करती है, जो शुरुआती दौर में चीन के बड़े हमलों को झेलने की क्षमता प्रदान करते हैं।

यदि संघर्ष अकेले होता है, तो चीन अपनी विशाल संख्या, मिसाइल शक्ति और नौसेना के आकार के कारण ज्यादातर विशेषज्ञों की नजर में विजयी होगा। जापान की अत्याधुनिक सेना भी अकेले चीन की शक्ति के आगे लंबे समय तक टिक नहीं पाएगी।

 

3. वैश्विक शक्तियों का निर्णायक हस्तक्षेप
चीन-जापान युद्ध के परिणाम को निर्धारित करने वाला सबसे बड़ा कारक तीसरी शक्तियों का हस्तक्षेप होगा।

अमेरिका :
जापान का अनिवार्य भागीदार अमेरिका का रुख इस संघर्ष में निर्णायक मोड़ लाएगा, और इसकी सबसे अधिक संभावना है कि वह जापान का साथ देगा। अगर जापान पर हमला होता है, तो अमेरिका उसकी रक्षा के लिए बाध्य होगा। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी पुष्टि की है कि यह संधि सेनकाकू द्वीपों पर भी लागू होती है।

सैन्य उपस्थिति :
अमेरिका के पास जापान (ओकिनावा) और गुआम में बड़े सैन्य अड्डे हैं। ये अड्डे संघर्ष की स्थिति में तेज़ी से प्रतिक्रिया देने और सैन्य सहायता प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

परिणाम :
अमेरिका के आने का मतलब होगा दुनिया की नंबर-1 सैन्य शक्ति का जापान के साथ जुड़ना। अमेरिकी सेना के 11 एयरक्राफ्ट कैरियर्स, परमाणु हथियार और उन्नत तकनीकों का मिश्रण चीन के लिए एक अजेय चुनौती पैदा कर देगा। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि अमेरिका की मदद से जापान चीन को हरा सकता है या कम से कम युद्ध को इतना लंबा खींच सकता है कि चीन के लिए जीतना असंभव हो जाए।

रूस :
चीन का संभावित रणनीतिक सहयोगी इस संघर्ष में रूस की भूमिका थोड़ी अधिक जटिल है, लेकिन संभावना यह है कि वह चीन का पक्ष लेगा या कम से कम परोक्ष रूप से उसका समर्थन करेगा।

चीन-रूस साझेदारी :
पिछले दशक में बीजिंग और मॉस्को के बीच एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी विकसित हुई है, जो मुख्य रूप से अमेरिका और नाटो के प्रभाव को संतुलित करने पर केंद्रित है।

लाभ :
रूस चीन को हथियार और खुफिया जानकारी जैसी महत्वपूर्ण सैन्य सहायता प्रदान कर सकता है। हालांकि, रूस यूक्रेन युद्ध में उलझा हुआ है, इसलिए वह सीधे तौर पर बड़ी सैन्य भागीदारी से बच सकता है।

प्रभाव :
रूस का समर्थन चीन को एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक बढ़ावा देगा और संघर्ष को पश्चिमी-विरोधी गठबंधन के रूप में बदल देगा, जिससे यह एक क्षेत्रीय युद्ध के बजाय एक वैश्विक शक्ति संघर्ष बन जाएगा।

 

4. युद्ध के संभावित परिदृश्य और विश्व पर प्रभाव
संभावित परिदृश्य :
चीन VS जापान (कोई बाहरी हस्तक्षेप नहीं) चीन अपनी संख्यात्मक और मिसाइल श्रेष्ठता के कारण जल्दी जीत दर्ज कर सकता है।

चीन VS जापान + अमेरिका :
यह सबसे संभावित और सबसे खतरनाक परिदृश्य है। यह युद्ध लंबा, थकाऊ और अनिश्चित होगा। यह पूरे एशिया में फैल सकता है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, भारत और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के शामिल होने की संभावना बढ़ जाएगी।

परमाणु युद्ध :
चीन के पास परमाणु हथियार हैं, जबकि जापान के पास नहीं। हालांकि, अमेरिका के पास विशाल परमाणु शस्त्रागार है। परमाणु हथियारों का उपयोग दोनों पक्षों के लिए आत्मघाती होगा, इसलिए इसकी संभावना बहुत कम है, लेकिन अगर पारंपरिक युद्ध में कोई भी पक्ष हारने की कगार पर आया तो यह अंतिम विकल्प बन सकता है।

आर्थिक परिणाम :
चूंकि चीन और जापान दुनिया की दूसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ हैं, युद्ध का आर्थिक परिणाम विनाशकारी होगा

आपूर्ति श्रृंखला का टूटना :
यह क्षेत्र दुनिया के आधे से अधिक सेमीकंडक्टर (चिप्स) का उत्पादन करता है। युद्ध से मोबाइल, कार और कंप्यूटर जैसे सभी इलेक्ट्रॉनिक सामानों का उत्पादन रुक जाएगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को ट्रिलियन डॉलर का झटका लगेगा।

तेल और व्यापार मार्ग :
समुद्री व्यापार मार्ग (जैसे मलक्का जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर) बंद हो जाएंगे, जिससे तेल और कच्चे माल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी और वैश्विक मुद्रास्फीति बेकाबू हो जाएगी।


चीन और जापान के बीच युद्ध के खतरे की तीव्रता हाल के वर्षों में बढ़ी है, लेकिन वास्तविक युद्ध की संभावना अभी भी बहुत कम है। दोनों देश एक-दूसरे पर बहुत अधिक आर्थिक रूप से निर्भर हैं, और दोनों ही जानते हैं कि युद्ध से होने वाला नुकसान किसी भी संभावित लाभ से कहीं अधिक होगा। चीन संख्यात्मक रूप से मजबूत है, लेकिन अमेरिका के साथ जापान का तकनीकी और सैन्य गठबंधन एक शक्तिशाली प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है। वर्तमान में, तनाव को कम करने और बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने पर ध्यान केंद्रित करना ही एकमात्र समझदारी भरा रास्ता है, क्योंकि पूर्वी एशिया में कोई भी सैन्य टकराव केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि एक विश्वव्यापी त्रासदी को जन्म देगा।

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