मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना: e-KYC की समय सीमा में वृद्धि और आय प्रमाण पत्र पर बड़ा प्रशासनिक फैसला
लाखों महिलाओं के लिए राहत भरी खबर महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना’, जिसका उद्देश्य राज्य की गरीब और मध्यम वर्गीय महिलाओं को सीधे वित्तीय सहायता प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाना है, हाल ही में दो बड़े प्रशासनिक फैसलों के कारण चर्चा में रही है। यह योजना प्रत्येक पात्र महिला को प्रतिमाह ₹1,500 की आर्थिक सहायता प्रदान करती है। योजना के निर्बाध संचालन के लिए अनिवार्य e-KYC ( इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर ) प्रक्रिया की अंतिम तिथि को बढ़ाना और आय प्रमाण पत्र (Income Certificate) के सत्यापन नियमों को कड़ा करना – ये दोनों निर्णय लाखों लाभार्थियों के भविष्य को सीधे प्रभावित करते हैं। जहाँ एक ओर समय सीमा का विस्तार तकनीकी चुनौतियों से जूझ रही महिलाओं के लिए राहत लेकर आया है, वहीं आय सत्यापन पर सख्ती ने योजना की पारदर्शिता और वास्तविक ज़रूरतमंदों तक पहुँच सुनिश्चित की है। ये फैसले योजना को और अधिक समावेशी और धोखाधड़ी-मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
1. योजना की पृष्ठभूमि और सामाजिक लक्ष्य :
‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना’ को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जाता है। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने, उन्हें घर और परिवार के निर्णयों में अधिक स्वतंत्रता देने और उनके जीवन स्तर में सुधार लाने के दोहरे लक्ष्य के साथ शुरू की गई थी। ₹1,500 की मासिक सहायता सीधे लाभार्थी महिला के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है, जो उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने से मुक्ति दिलाती है। योजना की सफलता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए e-KYC को अनिवार्य किया गया है, जिसके माध्यम से लाभार्थी का आधार कार्ड, बैंक खाता और मोबाइल नंबर लिंक किया जाता है। हालाँकि, इतनी बड़ी आबादी को कवर करने वाली किसी भी योजना में तकनीकी और दस्तावेजी चुनौतियाँ आना स्वाभाविक है, जिसने सरकार को महत्वपूर्ण बदलाव करने के लिए प्रेरित किया।
2. पहला बड़ा फैसला: e-KYC की समय सीमा में ऐतिहासिक वृद्धि :
योजना के सफल संचालन के लिए, सभी लाभार्थियों के लिए अपनी e-KYC प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। मूल रूप से, इसकी अंतिम तिथि 18 नवंबर 2025 निर्धारित की गई थी, लेकिन सरकार ने इसे 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दिया है।
समय सीमा बढ़ाने के तीन प्रमुख कारण : तकनीकी बाधाएँ (Technical Glitches): बड़े पैमाने पर e-KYC कराने के कारण सरकारी सर्वरों पर भारी दबाव पड़ा, जिससे कई लाभार्थियों को आधार सत्यापन और बैंक खाता लिंकिंग में लगातार विफलताएँ (Failures) मिलीं। कई महिलाएं तकनीकी रूप से जानकार न होने के कारण भी इस प्रक्रिया को समय पर पूरा नहीं कर पाई थीं।
प्राकृतिक आपदाओं का असर : महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों, विशेष रूप से तटीय और ग्रामीण हिस्सों में, हाल ही में आई बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं ने सामान्य जीवन को बाधित कर दिया था। कनेक्टिविटी टूटने और आवागमन मुश्किल होने के कारण, लाखों महिलाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेज़ एकत्र नहीं कर पाई थीं।
समावेशिता सुनिश्चित करना : सरकार का मुख्य उद्देश्य किसी भी पात्र महिला को योजना के लाभ से वंचित नहीं होने देना है। समय सीमा बढ़ाकर, सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि छूट गए सभी वास्तविक लाभार्थियों को अपनी e-KYC प्रक्रिया पूरी करने का पर्याप्त समय मिले।
इस निर्णय ने उन ग्रामीण और दूरदराज की महिलाओं को सबसे अधिक राहत प्रदान की है, जो तकनीकी पहुँच और जागरूकता की कमी से जूझ रही थीं।
3. दूसरा बड़ा फैसला :
आय प्रमाण पत्र पर सख्ती और पारिवारिक आय का सत्यापन योजना की अखंडता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए, सरकार ने आय प्रमाण पत्र और पात्रता सत्यापन के नियमों को लेकर एक कठोर और आवश्यक फैसला लिया है।
पारिवारिक आय पर फोकस : पुराना बनाम नया नियम, पहले, सत्यापन प्रक्रिया मुख्य रूप से महिला की व्यक्तिगत आय पर केंद्रित थी। लेकिन अब, पात्रता का मूल्यांकन संपूर्ण पारिवारिक आय के आधार पर किया जाएगा।
आय सीमा : योजना का लाभ केवल उन्हीं परिवारों को मिलेगा जिनकी कुल वार्षिक आय ₹2.5 लाख से अधिक नहीं है। विवाहित महिलाओं के लिए इसमें पति की आय और अविवाहित महिलाओं के लिए परिवार के मुखिया ( आमतौर पर पिता ) की आय शामिल होगी।
आवश्यकता : यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई मामलों में महिलाएं स्वयं काम नहीं करती हैं या उनकी आय शून्य होती है, जबकि उनके पति की आय पर्याप्त होती है। इस नए नियम से यह सुनिश्चित होगा कि वित्तीय सहायता वास्तव में गरीब और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों तक पहुँचे।
विशेष रूप से कमजोर महिलाओं के लिए नियम : सरकार ने विधवा, तलाकशुदा या परित्यक्ता महिलाओं के लिए दस्तावेज़ीकरण प्रक्रिया को स्पष्ट और सख्त बनाया है ताकि फर्जीवाड़ा न हो और वे सुरक्षित महसूस करें।
विधवा महिलाओं के लिए : जिन महिलाओं के पति का निधन हो चुका है, उन्हें अनिवार्य रूप से अपने पति का आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) e-KYC के समय या सत्यापन के दौरान प्रस्तुत करना होगा।
तलाकशुदा महिलाओं के लिए : तलाकशुदा लाभार्थियों को माननीय न्यायालय द्वारा जारी तलाक आदेश (Divorce Order) या तलाक प्रमाण पत्र की सत्यापित प्रतिलिपि महिला एवं बाल विकास अधिकारी के पास जमा करनी होगी। ये दस्तावेज़ जमा करने की प्रक्रिया को संबंधित महिला एवं बाल विकास अधिकारी की देखरेख में पूरा किया जाएगा, जो अंतिम सत्यापन के लिए जिम्मेदार होंगे। यह प्रशासनिक सख्ती योजना को दीर्घकालिक विश्वसनीयता प्रदान करती है।
4. सामने आई चुनौतियाँ और भविष्य की रणनीति :
योजना के क्रियान्वयन के दौरान कई तरह की चुनौतियाँ सामने आईं, जिनका समाधान विस्तारित समय सीमा और कड़े नियमों से किया जा रहा है
बैंक खाते और आधार लिंकिंग : कई ग्रामीण महिलाओं के बैंक खाते आधार से लिंक नहीं थे या उनकी KYC अधूरी थी, जिससे DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ) रुक गया था। अब महिला एवं बाल विकास विभाग बैंक अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करके इस समस्या को सामूहिक रूप से हल करने पर काम कर रहा है।
जागरूकता की कमी : ग्रामीण इलाकों में e-KYC और आवश्यक दस्तावेज़ों के बारे में जागरूकता की कमी थी। विस्तारित समय सीमा अब विभाग को व्यापक आउटरीच कार्यक्रम चलाने का मौका देती है।
पारदर्शिता और सशक्तिकरण का संतुलन मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना में e-KYC की अंतिम तिथि का विस्तार और आय प्रमाण पत्र पर सख्ती का फैसला, एक न्यायसंगत और पारदर्शी सामाजिक सुरक्षा ढाँचा बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जहाँ एक तरफ समय सीमा बढ़ाने से लाखों वंचित महिलाओं को प्रक्रिया पूरी करने का अवसर मिला है, वहीं दूसरी तरफ पारिवारिक आय पर ध्यान केंद्रित करने से यह सुनिश्चित होता है कि ₹1,500 की मासिक सहायता केवल उन्हीं परिवारों को मिलेगी जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। ये प्रशासनिक कदम न केवल योजना की सफलता के लिए, बल्कि महाराष्ट्र की महिलाओं को सही मायने में सशक्त बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं। यह स्पष्ट है कि सरकार चाहती है कि यह योजना एक अस्थायी चुनावी लाभ न होकर, महिला कल्याण के लिए एक स्थायी, निष्पक्ष और सुव्यवस्थित कार्यक्रम बने।
