भारत की बड़ी छलांग ! अब हाइपरसोनिक मिसाइल को भी रोकेगा भारत - जानिए पूरी तकनीक
हाइपरसोनिक मिसाइल रोकने की क्षमता विकसित करने की दिशा में भारत का पहला बड़ा कदम
भारत ने अपनी वायु और मिसाइल रक्षा प्रणाली को और अधिक उन्नत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब भारत केवल हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने पर ही नहीं, बल्कि हाइपरसोनिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट (रोकने) की तकनीक विकसित करने पर भी काम कर रहा है। यह उपलब्धि भारत को दुनिया के चुनिंदा देशों की सूची में शामिल कर सकती है, जो इस अत्याधुनिक सैन्य तकनीक पर कार्य कर रहे हैं।
🔹 हाइपरसोनिक मिसाइल क्या होती है ?
हाइपरसोनिक मिसाइल वह मिसाइल होती है जिसकी गति Mach 5 (ध्वनि की गति से पाँच गुना) या उससे अधिक होती है। यह लगभग 6,000 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा रफ्तार से उड़ती है।
इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये :
बेहद तेज गति से चलती हैं
रास्ते में दिशा बदल सकती हैं (manoeuvrable)
रडार से बचकर उड़ान भर सकती हैं
पारंपरिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकती हैं
इसी कारण इन्हें रोकना अत्यंत कठिन होता है।
🔹 भारत को हाइपरसोनिक इंटरसेप्शन की आवश्यकता क्यों है ?
वर्तमान वैश्विक स्थिति को देखते हुए, कई देश हाइपरसोनिक हथियार विकसित कर चुके हैं या कर रहे हैं। इनमें प्रमुख हैं :
चीन – DF-ZF हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल
रूस – Avangard और Kinzhal मिसाइल
अमेरिका – कई हाइपरसोनिक प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है
भारत की भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि वह ऐसी मिसाइलों से खुद की रक्षा कर सके।
भारत के संभावित खतरे :
चीन की हाइपरसोनिक क्षमता
भविष्य में पाकिस्तान द्वारा ऐसी तकनीक प्राप्त करना
अंतरिक्ष आधारित हथियार प्रणालियाँ
इसीलिए भारत ने अब Hypersonic Missile Defence System विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
🔹 भारत का पहला कदम : तकनीकी आधार तैयार करना
भारत के रक्षा अनुसंधान संगठन DRDO (Defence Research and Development Organisation) ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। इसके अंतर्गत :
हाइपरसोनिक सेंसर और रडार सिस्टम
अत्यधिक तेज गति वाले लक्ष्यों को ट्रैक करने में सक्षम
AI आधारित डेटा प्रोसेसिंग
नए इंटरसेप्टर मिसाइल सिस्टम
मौजूदा PAD और AAD से कहीं अधिक तेज
एक्सो-एटमॉस्फेरिक (वायुमंडल के बाहर) और एंडो-एटमॉस्फेरिक (अंदर) दोनों स्तरों पर रोकने की क्षमता
नई ट्रैकिंग तकनीक
IR (Infrared) सेंसर
सैटेलाइट बेस्ड वार्निंग सिस्टम
🔹 हाइपरसोनिक इंटरसेप्शन कितना कठिन है ?
हाइपरसोनिक मिसाइल को रोकना बैलिस्टिक मिसाइल रोकने से कई गुना कठिन है क्योंकि :
इसकी गति अत्यंत तेज होती है
यह रास्ता बदल सकती है
इसका फ्लाइट पाथ अनुमान लगाना मुश्किल होता है
रडार से बचने की क्षमता होती है
इसलिए भारत को चाहिए :
सुपरकंप्यूटर आधारित कैलकुलेशन
अत्यधिक तेज रिस्पॉन्स टाइम
अत्याधुनिक सेंसर नेटवर्क
🔹 भारत की मौजूदा मिसाइल डिफेंस प्रणाली
भारत पहले से ही Ballistic Missile Defence (BMD) प्रोग्राम पर काम कर रहा है। इसके प्रमुख हिस्से हैं :
PAD (Prithvi Air Defence)
AAD (Advanced Air Defence)
S-400 Triumf (रूस से प्राप्त)
Akash और Barak-8
अब इन प्रणालियों से भी आगे बढ़कर भारत Hypersonic Defence Layer जोड़ने जा रहा है।
🔹 हाइपरसोनिक हथियारों में भारत की उपलब्धि
भारत पहले ही हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी में काम कर चुका है :
HSTDV (Hypersonic Technology Demonstrator Vehicle)
स्क्रैमजेट इंजन परीक्षण
2020 में सफल परीक्षण
6 Mach से अधिक गति प्राप्त
यह अनुभव अब इंटरसेप्शन सिस्टम बनाने में काम आएगा।
🔹 रणनीतिक महत्व (Strategic Importance)
हाइपरसोनिक मिसाइल इंटरसेप्शन क्षमता मिलने से :
✔ भारत की सुरक्षा मजबूत होगी
✔ न्यूक्लियर डिटरेंस (Nuclear Deterrence) बढ़ेगा
✔ दुश्मन को हमला करने से पहले कई बार सोचना पड़ेगा
✔ भारत रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भर बनेगा
✔ भारत वैश्विक सैन्य शक्ति के रूप में उभरेगा
🔹 वैश्विक प्रभाव
यदि भारत इस तकनीक में सफल होता है, तो वह दुनिया के उन कुछ देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास :
हाइपरसोनिक हथियार
और उन्हें रोकने की क्षमता
दोनों मौजूद होंगी।
यह भारत को :
अमेरिका
रूस
चीन
जैसी सैन्य तकनीकी शक्तियों की श्रेणी में लाएगा।
🔹 भविष्य की योजना
भारत की भविष्य की रणनीति में शामिल है :
स्पेस-बेस्ड डिफेंस सिस्टम
लेजर आधारित इंटरसेप्टर
AI से नियंत्रित मिसाइल ट्रैकिंग
मल्टी-लेयर डिफेंस शील्ड
हाइपरसोनिक मिसाइल शील्ड
DRDO, ISRO और भारतीय सेना मिलकर इस दिशा में संयुक्त प्रयास कर रहे हैं।
🔹 चुनौतियाँ
हालांकि यह तकनीक अत्यंत उन्नत है, फिर भी कई चुनौतियाँ हैं :
अत्यधिक लागत
जटिल तकनीकी ढांचा
सीमित परीक्षण अवसर
सेंसर की सटीकता
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से सुरक्षा
इन चुनौतियों के बावजूद भारत का लक्ष्य है कि वह अगले कुछ वर्षों में एक प्रारंभिक हाइपरसोनिक इंटरसेप्शन सिस्टम विकसित कर ले।
भारत का हाइपरसोनिक मिसाइल इंटरसेप्शन क्षमता विकसित करने का निर्णय उसकी रक्षा रणनीति में ऐतिहासिक बदलाव है। अब भारत केवल हमला करने की शक्ति ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक हमलों से खुद को बचाने की क्षमता भी विकसित कर रहा है।
यह कदम न केवल भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि उसे एक तकनीकी महाशक्ति के रूप में भी स्थापित करेगा। आने वाले वर्षों में यदि भारत इस तकनीक में सफल होता है, तो यह रक्षा विज्ञान के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी उपलब्धि मानी जाएगी।
