आत्मनिर्भर भारत की उड़ान ! भारत में बनेगा SJ-100 जेट विमान
भारत और रूस के बीच विमानन क्षेत्र में सहयोग दशकों से चल रहा है। यह साझेदारी केवल हथियारों का आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि अब उत्पादन और निर्माण जैसे गहन सहयोग तक बढ़ रही है। खासकर एचएएल (HAL) और रूसी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के बीच जो समझौते हुए हैं, वे भारतीय विमानन उद्योग के भविष्य को बदल सकते हैं।
1) साझेदारी का पृष्ठभूमि – HAL और UAC
Hindustan Aeronautics Limited (HAL) भारत की एक सरकारी विमान निर्माण कंपनी है, जिसकी स्थापना 1940 के दशक में हुई थी। यह कंपनी कई प्रकार के युद्धक व नागरिक विमानों के उत्पादन, मुरम्मत और विकास में प्रमुख भूमिका निभाती है।
United Aircraft Corporation (UAC) रूस की प्रमुख विमान निर्माता कंपनी है, जिसमें सुखोई (Sukhoi), जैसे बड़े विमान ब्रांड शामिल हैं। UAC रूस की एयरक्राफ्ट डिजाइन और उत्पादन की नींव है।
भारत और रूस ने वर्षों से रक्षा व विमानन सहयोग किया है, जैसे कि Su-30MKI लड़ाकू जेट का उत्पादन भारत में HAL के संयोजन से होता रहा है। इस सहयोग की वजह से दोनों देशों के बीच तकनीकी विश्वास काफी मजबूत हुआ है।
2) डील क्यों महत्वपूर्ण है
भारत में मेघा विमान निर्माण क्षमता मजबूत करना वर्षों से एक लक्ष्य रहा है। भारत पहले भी कई विमानों का निर्माण करता रहा है, लेकिन पूरा यात्री जेट विमान निर्मित करने का मौका उसे 1988 के बाद पहली बार मिल रहा है। इससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को बहुत बल मिलेगा।
3) डील का मूल वस्तु – SJ-100 विमान उत्पादन
सबसे बड़ा समझौता अप्रैल-अक्टूबर 2025 में हुआ जब HAL और UAC ने मॉस्को में एक MoU (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किया। इसके तहत भारत में रूसी डिजाइन का SJ-100 (Yakovlev SJ-100) नामक विमान का उत्पादन किया जाएगा।
SJ-100 क्या है ?
SJ-100 एक शॉर्ट-टू-मीडियम रेंज वाला ट्विन-इंजन नागरिक जेट विमान है।
यह विमान मुख्य रूप से क्षेत्रीय उड़ानों (regional air travel) के लिए बनाया गया है।
विश्वभर में इससे पहले 200+ यूनिट्स पहले से ही विमान कंपनियों द्वारा संचालित हो रहे हैं।
भारत में इसे UDAN योजना जैसी परियोजनाओं के तहत छोटे और माध्यम शहरों के बीच उड़ानें संचालित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
4) समझौते के मुख्य बिंदु
✅ स्थानीय उत्पादन का अधिकार
HAL को SJ-100 विमान का भारत में उत्पादन करने का अधिकार दिया गया है। इसका अर्थ है :
भारत में विमान के फाइनल असेंबली और उत्पादन की तैयारी हो सकती है।
विमान के पार्ट्स भारत या रूस दोनों से आ सकते हैं, लेकिन असेंबली भारत में होगी।
यह पहले से उपलब्ध तकनीक की तुलना में पुरा विमान निर्माण का सबसे बड़ा कदम है।
✅ पहला पूरा यात्री विमान प्रोडक्शन
यह डील भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि :
1988 के बाद पहली बार भारत में पूरे यात्री विमान का उत्पादन होने वाला है — पहली बार AVRO HS-748 के बाद।
5) तकनीकी और आर्थिक पहलू
🛠️ तकनीकी लाभ
भारतीय उद्योग को विमान निर्माण की उन्नत तकनीक सीखने को मिलेगी।
असेंबली लाइन के माध्यम से भारत में विमान उत्पादन के लिए संसाधन, उपकरण और मानव कौशल का विकास होगा।
प्रोडक्शन के दौरान रूसी इंजीनियरिंग और समर्थन भी मिल सकता है।
📈 आर्थिक लाभ
विमान उत्पादन उद्योग में हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा।
भारत के गौण उद्योगों (parts, avionics support, logistics) में बड़ा आर्थिक उछाल आएगा।
यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों को सुदृढ़ करेगा।
6) विमान उपयोग की संभावनाएँ
✈️ घरेलू उड़ान नेटवर्क
SJ-100 का उपयोग रोगन-स्थानीय (regional) उड़ानों में किया जा सकता है, जैसे UDAN योजना वाली शहरों के बीच।
छोटे शहरों में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ेगी, जिससे आर्थिक गतिविधि भी बढ़ेगी।
🌏 भारतीय एयरलाइंस के लिए अवसर
एयरलाइंस कंपनियां जैसे एयर इंडिया एक्सप्रेस, इंडिगो, स्पाइसजेट आदि इस श्रेणी के विमान को शामिल कर सकती हैं।
इसका सकारात्मक प्रभाव टिकट की कीमतों और एयर कनेक्टिविटी पर मिलेगा।
7) चुनौतियाँ और नीतिगत पहलू
⚙️ तकनीकी चुनौतियाँ
SJ-100 पहले से ही रूस-निर्मित विमान है लेकिन भारत में पूर्ण उत्पादन के लिए तकनीकी तालमेल जरूरी है।
विमान के कुछ हिस्सों के लिए रूस-पर निर्भरता बनी रह सकती है।
🔐 बौद्धिक संपदा और नियंत्रण
इस डील में डिज़ाइन और IP (बौद्धिक संपदा) अधिकार रूस के पास ही रह सकते हैं।
🌍 वैश्विक राजनीति
रूस पर अभी अमेरिकी और पश्चिमी प्रतिबंध लागू हैं, जिसका असर डील के वित्त, पुर्जों की सप्लाई और प्रोडक्शन पर पड़ सकता है।
8) क्या फाइटर जेट Su-57 पर भी डील हो सकता है?
कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि रूस ने भारत को Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट पर भी उत्पादन प्रस्ताव दिया है। लेकिन यह अभी तक औपचारिक समझौता नहीं है, सिर्फ चर्चाओं और प्रस्तावों का स्तर पर है।
यदि ऐसा समझौता होता है, तो वह न केवल नागरिक विमानन बल्कि रक्षा उत्पादन में भी भारत के लिए बड़ी छलांग होगी। लेकिन फिलहाल वास्तविक और निष्क्रिय MoU SJ-100 नागरिक विमान निर्माण के लिए है।
